|
१ मैं अपने छोटे मुख कैसे करूँ तेरा गुणगान माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान
माता कौशल्या के घर में जन्म राम ने पाया ठुमक-ठुमक आँगन में चलकर सबका हृदय जुड़ाया पुत्र प्रेम में थे निमग्न कौशल्या माँ के प्राण माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान
दे मातृत्व देवकी को यसुदा की गोद सुहाई ले लकुटी वन-वन भटके गोचारण कियो कन्हाई सारे ब्रजमंडल में गूँजी थी वंशी की तान माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान
तेरी समता में तू ही है मिले न उपमा कोई तू न कभी निज सुत से रूठी मृदुता अमित समोई लाड़-प्यार से सदा सिखाया तूने सच्चा ज्ञान माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान
कभी न विचलित हुई रही सेवा में भूखी प्यासी समझ पुत्र को रुग्ण मनौती मानी रही उपासी प्रेमामृत नित पिला पिलाकर किया सतत कल्याण माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान
'विकल' न होने दिया पुत्र को कभी न हिम्मत हारी सदय अदालत है सुत हित में सुख-दुख में महतारी काँटों पर चलकर भी तूने दिया अभय का दान माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान
https://www.google.co.in/webhp?sourceid=chrome-instant&ion=1&espv=2&ie=UTF-8#q=aslam%20sonu%20a%20s%20group |
must ilkie
ReplyDelete