aslam sonu laxminiya

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Sunday, 30 October 2016

डाकू अंगुलिमाल और महात्मा बुद्ध Buddha Angulimal Story in Hindi

डाकू अंगुलिमाल और महात्मा बुद्ध Buddha Angulimal Story in Hindi by aslam sonu a s group

डाकू अंगुलिमाल और महात्मा बुद्ध Buddha Angulimal Story in Hindi


Budhha Angulimal Story in Hindi
रुको।।।रुको!
बहुत पुरानी बात है मगध राज्य में एक सोनापुर नाम का गाँव था। उस गाँव के लोग शाम होते ही अपने घरों में आ जाते थे। और सुबह होने से पहले कोई कोई भी घर के बाहर कदम भी नहीं रखता था।इसका कारण डाकू अंगुलीमाल था।
डाकू अंगुलीमाल मगध के जंगलों की गुफा में रहता था। वह लोगों को लूटता था और जान से भी मार देता था। लोगों को डराने के लिए वह जिसे भी मारता उसकी एक ऊँगली काट लेता और उन उँगलियों की माला बनाकर पहनता। इसलिए उसका नाम अंगुलिमाल पड़ा। गाँव के सभी लोग परेशान थे कैसे इस डाकू के आतंक से छुटकारा मिले।
एक दिन गौतम बुद्ध उस गाँव में आये। गाँव के लोग उनकी आवभगत करने लगे। गौतम बुद्ध ने देखा कि गाँव के लोगों में किसी बात को लेकर देहशत फैली है!
तब गौतम बुद्ध ने गाँव वालों से इसका कारण पूछा- ये सुनते ही गाँव वालों ने अंगुलिमाल के आतंक का पूरा किस्सा उन्हें सुनाया।
अगले ही दिन गौतम बुद्ध जंगल की तरफ निकल गये, गाँव वालों ने उन्हें बहुत रोका पर वो नहीं माने। बुद्ध को आते देख अंगुलिमाल हाथों में तलवार लेकर खड़ा हो गया, पर बुद्ध उसकी गुफा के सामने से निकल गए उन्होंने पलटकर भी नहीं देखा। अंगुलिमाल उनके पीछे दौड़ा, पर दिव्य प्रभाव के कारण वो बुद्ध को  पकड़ नहीं पा रहा था।
थक हार कर उसने कहा- “रुको”
बुद्ध रुक गए और मुस्कुराकर बोले- मैं तो कबका रुक गया पर तुम कब ये हिंसा रोकोगे।
अंगुलिमाल ने कहा- सन्यासी तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता। सारा मगध मुझसे डरता है। तुम्हारे पास जो भी माल है निकाल दो वरना, जान से हाथ धो बैठोगे। मैं इस राज्य का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हूँ।
बुद्ध जरा भी नहीं घबराये और बोले- मैं ये कैसे मान लूँ कि तुम ही इस राज्य के सबसे शक्तिशाली इन्सान हो। तुम्हे ये साबित करके दिखाना होगा।
अंगुलिमाल बोला बताओ- “कैसे साबित करना होगा?”।
बुद्ध ने कहा- “तुम उस पेड़ से दस पत्तियां तोड़ कर लाओ”।
अंगुलिमाल ने कहा- बस इतनी सी बात, “मैं तो पूरा पेड़ उखाड़ सकता हूँ”।
अंगुलिमाल ने दस पत्तियां तोड़कर ला दीं।
बुद्ध ने कहा- अब  इन पत्तियों को वापस पेड़ पर जाकर लगा दो।
अंगुलिमाल ने हैरान होकर कहा- टूटे हुए पत्ते कहीं वापस लगते हैं क्या ?
तो बुद्ध बोले – जब तुम इतनी छोटी सी चीज़ को वापस नहीं जोड़ सकते तो तुम सबसे शक्तिशाली कैसे हुए ?
यदि तुम किसी चीज़ को जोड़ नहीं सकते तो कम से कम उसे तोड़ो मत, यदि किसी को जीवन नहीं दे सकते तो उसे म्रत्यु देने का भी तुम्हे कोई अधिकार नहीं है।
ये सुनकर अंगुलीमाल को अपनी गलती का एहसास हो गया। और वह बुद्ध का शिष्य बन गया। और उसी गाँव में रहकर लोगों की सेवा करने लगा।
आगे चलकर यही अंगुलिमाल बहुत बड़ा सन्यासी बना और अहिंसका के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी इन्सान कितना ही बुरा क्यों न हो, वह बदल सकता है। दोस्तों, अंगुलिमाल बुराई का एक प्रतीक है, और हम सबमें छोटे-बड़े रूप में कोई न कोई बुराई है। ज़रूरत इस बात की है कि हम अपने अन्दर की बुराइयों को पहचाने और उन्हें ख़त्म करें।
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शेयर मार्केट में पैसा कैसे डूबता है ??

शेयर मार्केट में पैसा कैसे डूबता है ??
एक बार एक आदमी ने गाँव वालों से
कहा कि वो 100 रु. में एक बन्दर खरीदेगा,
ये सुनकर सभी गाँव वाले
नजदीकी जंगल की ओर दौड़ पड़े
और वहां से बन्दर पकड़ पकड़ कर 100
रु. में उस आदमी को बेचने लगे …….
कुछ दिन बाद ये सिलसिला कम हो गया और
लोगों की इस बात में दिलचस्पी कम
हो गयी …….
फिर उस आदमी ने
कहा की वो एक एक बन्दर के
लिए 200 रु. देगा ,
ये सुनकर लोग फिर बन्दर पकड़ने में लग गये।
लेकिन कुछ दिन बाद मामला फिर
ठंडा हो गया ….
अब उस आदमी ने
कहा कि वो बंदरों के लिए 500 रु. देगा ,
लेकिन क्यूंकि उसे शहर जाना था,
उसने इस काम के लिए एक असिस्टेंट
नियुक्त कर दिया ……..
500 रु. सुनकर गाँव वाले बदहवास
हो गए, लेकिन पहले ही लगभग सारे बन्दर
पकड़े जा चुके थे इसलिए उन्हें कोई हाथ
नहीं लगा ……।
तब उस आदमी का असिस्टेंट उनसे आकर
कहता है …..
“आप लोग चाहें तो सर के पिंजरे में
से 400 -400 रु. में बन्दर खरीद सकते हैं ,
जब सर आ जाएँ तो 500-500 में बेच दीजियेगा।”
गाँव वालों को ये प्रस्ताव भा गया और उन्होंने (100-200 रु. में बेचे हुए) सारे बन्दर 400 – 400 रु. में खरीद लिए ….।
अगले दिन न वहां कोई असिस्टेंट था और न ही कोई सर.।
बस बन्दर ही बन्दर…!!

hindi kahani 2017

दोस्तों हममें से हर कोई अपनी life में कुछ न कुछ जरुर करना चाहता है, लेकिन हमें उसके लिए time ही नहीं मिलता । For example- हम ये सोचते हैं कि हम ये सीखेंगे, ऐसा करेंगे-वैसा करेंगे…अपने main goal की तरफ थोडा आगे बढ़ेंगे लेकिन हकीकत में हम आगे बढ़ते नहीं। और ऐसा न कर पाने का एक common excuse है कि “हमें वक़्त ही नहीं मिलता !”

इसलिए आज मैं आपके लिए कुछ ऐसे रियल लाइफ examples लाया हूँ जिनके बारे में जानकर आप सच में inspire होंगे। ये हमें समय के पाबंद होने के लिए प्रेरित तो करते हीहैं साथ में ये भी बताते हैं कि कोई इंसान कितना भी busy होकर भी अपने मनपसंद काम में कैसे आगे बढ़ सकता है:
USA के famous Mathematician Charles F ने रोज केवल एक घंटा Maths सीखने का नियम बनाया था और उस नियम पर अंत तक डटे रहकर ही Maths में महारथ हासिल की।
ईश्वरचन्द्र विद्यासागर जब कॉलेज जाते थे तो रास्ते के दुकानदार अपनी घड़ियाँ उन्हें देखकर ठीक करते थे। वे जानते थे कि विद्यासागर कभी एक मिनट भी आगे-पीछे नहीं चलते।
मोजार्ट ने हर घडी उपयोगी कार्य में लगे रहना अपना जीवन का आदर्श बना लिया था। उन्होंने रैक्युम नामक famous ग्रन्थ मौत से लड़ते-लड़ते पूरा किया।
ब्रिटिश कामनवेल्थ के मंत्री का अत्याधिक व्यस्त उत्तरदायित्व निभाते हुए मिल्टन ने ‘पैराडाइस लॉस्ट‘ कि रचना की। राजकाज से उन्हें बहुत कम समय मिल पाता था तो भी जितने कुछ मिनट वह बचा पाते उसी में उस काव्य पर काम कर लेते।
Gallileo की medical shop थी फिर भी उसने थोडा-थोडा समय बचाकर विज्ञानं के महत्वपूर्ण आविष्कार कर डाले।
Henry Kirak ने घर से office तक पैदल आने-जाने के समय का सदुपयोग करके Greek सीख ली। फौजी डॉक्टर बनने पर उनका अधिकांश समय घोड़े की पीठ पर बीतता था। उन्होंने उस समय भी Italian और French भाषा सीख ली।
Edward Vatlar ने राजनीति और parliament के कार्यक्रमों में busy रहते हुए भी 60 ग्रंथों की रचना कर ली। वह कहते हैं कि उन्होंने रोज तीन घंटे का समय पढने और लिखने के लिए fix किया था।
रोज चाय बनाने के लिए पानी उबालने में जितना समय लगता है , उसमे व्यर्थ न बैठकर लान्गफैले ने इन्फरल ग्रन्थ का अनुवाद कर लिया।
Napolean ने ऑस्ट्रिया को इसलिए हरा दिया क्योंकि वहां के सैनिक उसका सामना करने के लिए पाँच मिनट देरी से आये।
Waterloo के युद्ध में Napolean इसलिए बंदी बना लिया गया क्योंकि उसका सेनापति पाँच मिनट देरी से आया।
महात्मा गाँधी दातुन करने से पहले शीशे पर गीता का श्लोक चिपका लिया करते थे और दातुन करते समय याद कर लिया करते थे, इस तरह से उन्होंने गीता के 13 अध्याय याद कर लिए।
It is very surprising that कोई केवल रोज एक घंटे पढ़कर expert बन गया तो किसी ने पैदल चलने का time का भी use किया तो किसी ने पानी उबलने का time भी use किया। कोई पाँच मिनट की देरी से हार जाता है तो कोई ऐसा ही कि लोग अपनी घडी से ज्यादा उसके समय की पाबंदी पर भरोसा है और कोई ऐसा भी है जो मौत से लड़ते लड़ते भी किताब लिखता है।
जब लोग उसी २४ घंटे में इतना कुछ कर सकते हैं तो प्रश्न उठता है कि आखिर हमारा समय कहाँ बर्बाद हो रहा है ?
Really, हमे हमारा goal achieve करने के लिए जितना time चाहिए उससे कहीं ज्यादा time हमारे पास होता है। बस जरुरत है उस अमूल्य समय को बर्बाद होने से बचाने की।http://aslatest.blogspot.in/