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Wednesday, 23 March 2016

होली और संगीत story of holi in hindi

होली और संगीतआस्था
भारतीय शास्त्रीय संगीत तथा लोक संगीत की परंपरा में होली का विशेष महत्व है। हिंदी फ़िल्मों के गीत भी होली के रंग से अछूते नहीं रहे हैं। होली के सतरंगी रंगों के साथ सात सुरों का अनोखा संगम देखने को मिलता है! रंगों से खेलते समय मन में खुशी, प्यार और उमंग छा जाते हैं और अपने आप तन मन नृत्य करने को मचल उठता है। लय और ताल के साथ पैर को रोकना मुश्किल हो जाता है। रंग अपना असर बताते हैं, सुर और ताल अपनी धुन में सब को डुबोये चले जाते हैं!
शास्त्रीय संगीत में धमार का होली से गहरा संबंध है। ध्रुपद, धमार, छोटे व बड़े ख्याल और ठुमरी में भी होली के गीतों का सौंदर्य देखते ही बनता है। कथक नृत्य के साथ होली, धमार और ठुमरी पर प्रस्तुत की जाने वाली अनेक सुंदर बंदिशें आज भी अत्यंत लोकप्रिय हैं - चलो गुंइयाँ आज खेलें होरी कन्हैया घर। इसी प्रकार संगीत के एक और अंग ध्रुपद में भी होली के सुंदर वर्णन मिलते हैं। ध्रुपद में गाये जाने वाली एक लोक के बोल देखिए-"खेलत हरी संग सकल, रंग भरी होरी सखी,
कंचन पिचकारी करण, केसर रंग बोरी आज।
भीगत तन देखत जन, अति लाजन मन ही मन,
ऐसी धूम बृंदाबन, मची है नंदलाल भवन।"
धमार संगीत का एक अत्यंत प्राचीन अंग है। गायन और वादन दोनों में इसका प्रयोग होता है। यह ध्रुपद से काफी मिलता जुलता है पर एक विशेष अंतर यह है कि इसमें वसंत, होली और राधा कृष्ण के मधुर गीतों की अधिकता है। इसे चौदह मात्रा की धमार ही नाम की ताल के साथ विशेष रूप से गाया जाता है इसमें निबद्ध एक प्रसिद्ध होली के बोल हैं - आज पिया होरी खेलन आए
भारतीय शास्त्रीय संगीत में कुछ राग ऐसे हैं जिनमें होली के गीत विशेष रूप से गाए जाते हैं। बसंत, बहार, हिंडोल और काफी ऐसे ही राग हैं। बसंत राग पर आधारित -"फगवा ब्रज देखन को चलो रे,
फगवे में मिलेंगे, कुँवर कां
जहाँ बात चलत बोले कागवा।
बहार राग पर आधारित "छम छम नाचत आई बहार''
और काफी में -
"आज खेलो शाम संग होरी
पिचकारी रंग भरी सोहत री।" प्रसिद्ध बंदिशें हैं।

होली पर गाने बजाने का अपने आप वातावरण बन जाता है और जन जन पर इसका रंग छाने लगता है। इस अवसर पर एक विशेष लोकगीत गाया जाता है जिसे होली कहते हैं। अलग-अलग स्थानों पर होली के विभिन्न वर्णन सुनने को मिलते है जिसमें उस स्थान का इतिहास और धार्मिक महत्व छुपा रहता है। जहाँ ब्रज धाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के।
जैसे गुजरात में नवरात्र, महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी, पंजाब में बैसाखी, दक्षिण भारत में पोंगल, बंगाल में दुर्गा पूजा, को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है और महत्व दिया जाता है, ऐसे ही राजस्थान में होली का बहुत महत्व है और इन त्योहार में संगीत का एक अलग ही स्थान रहा है। संगीत बिना इन सब त्योहारों की कल्पना भी करना मुश्किल-सा लगता है।
इन सब त्योहारों में होली एकता का प्रतीक है। राजस्थान के अजमेर शहर में "ख्वाजा मोईउद्दीन चिश्ती" की दरगाह जाने वाली होली का विशेष रंग है। ख्वाजा मोईउद्दीन ने होली को विशेष महत्व दिया है। कहते हैं वे खुद भी होली खेला करते थे। उनकी भक्ति में जो कव्वालियाँ गाई जाती हैं, उसमें भी रंगों का उल्लेख आता है -
"आज रंग है री मन रंग है,
अपने महबूब के घर रंग है री।
भारतीय फ़िल्मों में भी अलग-अलग रागों पर आधारित होली के गीत प्रस्तुत किए गए हैं जो काफी लोकप्रिय हुए हैं। 'सिलसिला' के गीत "रंग बरसे भीगे चुनर वाली, रंग बरसे" और 'नवरंग' के "आया होली का त्योहार, उड़े रंगों की बौछार," को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं।
इस तरह, रंग और संगीत चोली दामन की तरह एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उनका असर मन पर, कैसे और कितनी हद तक होता है, यह होली के त्योहार में दिखाई देता है। मन की खुशी, प्रेम, उमंग, तरंग इन सब भावों को अभिव्यक्त करने के लिये रंग और संगीत होली के त्योहार का अनोखा माध्यम बन जाते हैं। लोग अपने मन के दुख और द्वेष भाव को मिटाकर रंगों की दुनिया में सुर और ताल के संग अपने आप को डुबो लेते हैं। चारों तरफ़ खुशी, प्यार और अपनेपन का एक अलग वातावरण बन जाता हैं। रंग मन के भावों को अभिव्यक्त करते हैं, संगीत जीवन की साधना है, और इन दोनों के समन्वय की मिसाल है होली का बेमिसाल त्योहार!aslam sonua s group laxminiya 22 march 2016  
aslam sonu 

प्याज़ की पुकार profit of onion in hindi by aslamsonuasgroup

प्याज़ की पुकार
क्या आप जानते हैं?
  • कि विश्व के सभी देशों के लोग प्याज़ खाते हैं।


  • कि सब्ज़ी उत्पादन के आँकड़ों में प्याज़, टमाटर के बाद दूसरे स्थान पर है।


  • कि रंगों के अनुसार हर प्रकार के स्वाद में अलग रंग और गंध होते हैं।
     
  • कि पीले तथा लाल प्याज़ में सफेद प्याज़ की तुलना में अधिक एन्टीआक्सीडेंट तथा फ्लेवेनोइड होते हैं।
     
  • कि ज़्यादा तीखे तथा गहरे रंग के प्याज़ सेहत की दृष्टि से ज़्यादा अच्छे होते हैं।
प्याज विश्व की सबसे लोकप्रिय सब्जियों में से एक है। बहुत से भोजनों में यह एक आवश्यक सामग्री में होता है, इसीलिए सब्ज़ी उत्पादन के आँकड़ों में प्याज़, टमाटर के बाद दूसरे स्थान पर है। रंगों के आधार पर प्याज़ के बहुत से प्रकार बाज़ार में देखने को मिलते हैं जैसे लाल, सफ़ेद, पीला, हरा आदि। हर एक प्रकार के प्याज़ का अपना अलग स्वाद, और अपनी अलग गंध होती है। पीले तथा लाल प्याज़ में सफेद प्याज़ की तुलना में अधिक एन्टीआक्सीडेंट तथा फ्लेवेनोइड होते हैं। प्याज़ खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि ज़्यादा तीखे तथा गहरे रंग के प्याज़ सेहत की दृष्टि से ज़्यादा अच्छे होते हैं। प्याज़ सेहत के लिए बहुत लाभदायक हैं परंतु अति अच्छी नहीं होती। अधिक मात्रा में प्याज़ खाने से पेट खराब भी हो सकता है।प्याज़ को बिना रोए छीलना चाहें तो इसे बहते पानी में छीलें। गरम पानी में एक मिनट प्याज़ को रखने पर भी बिना आँसू बहाए प्याज़ काटा जा सकता हैं।
प्याज़ की तीखी गंध सल्फर के कारण होती है, जब प्याज़ के ऊतक (टिश्यूज़) को काटा जाता है तब पानी में घुलनशील अमीनो एसिड की एन्जाइम क्रिया के फलस्वरूप यह सल्फर बनता है। गरम करने पर तथा फ्रीज़ करने पर एन्जाइम की यह क्रिया रुक जाती है इसलिए प्याज़ का स्वाद और गंध भी बदल जाते है। पके हुए प्याज़ में नमी, प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट तथा मिनरल होते हैं। इसमें पाए जाने वाले मिनरल तथा विटामिन में कैल्सियम, फोस्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थियामीन, राइबोफ्लेविन तथा नियासीन होता है। प्रति सौ ग्राम प्याज़ में तकरीबन ५१ कैलोरी होती हैं।
प्याज़ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। दादी के नुस्खों में भी प्याज़ का ज़िक्र अक्सर होता है। मिस्र में प्याज़ को बहुत-सी बीमारियों के इलाज में काम में लिया जाता था। प्याज़ को भोजन के साथ खाना बहुत लाभदायक है पर कच्चा प्याज़ ज़्यादा फ़ायदा करता है। पके हुए प्याज़ को पचाना थोड़ा मुश्किल होता है। बहुत-सी बीमारियों के इलाज के लिए पूरे प्याज़ की बजाए प्याज़ के रस को काम में लिया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि प्याज़ बलगम को पतला करता है और फिर से उसको बनने से रोकता है। खाँसी, जुकाम, ब्रोंकाइटिस, इन्फ्लुएंज़ा जैसी बहुत-सी तकलीफों में प्याज़ दवा के रूप में काम में आता है। शहद तथा प्याज़ के रस को बराबर मात्रा में मिला कर दिन में तीन-चार छोटी चम्मच हर रोज़ पीने से बहुत फ़ायदा होता है। कफ से होने वाली बीमारियों से निजात पाने के लिए यह बहुत सुरक्षित, किफ़ायती तथा फ़ायदेमंद तरीका है। प्याज़ में बैक्टीरियानाशक गुण होते हैं। जिसे दाँतों में तकलीफ़ हो वे एक कच्चा प्याज़ प्रतिदिन चबाएँ, इससे बहुत आराम मिलेगा। ऐसा कहते हैं कि कच्चे प्याज़ को तीन मिनिट तक चबाने से मुँह के अन्दर मौजूद जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
चीनी लोग प्याज़ को हृदय रोग से सम्बंधित बीमारियों के इलाज में उपयोग में लेते हैं। प्याज़ में बहुत से आवश्यक तेल तथा कैल्शियम, फोस्फोरस, आयरन, विटामिन, एलिप्रोपाइल डाईसल्फाइड, कैटेकोल, फ्लेवेनोइड आदि रसायन भी होते हैं। हृदय रोगियों के लिए यह बहुत लाभदायक होते हैं। प्याज़ में लसहुन की तरह सल्फाइड भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। सल्फाइड रक्त लिपिड को कम करते हैं तथा रक्त चाप को नियंत्रित भी करते हैं। भारत में कुछ जाति के लोग प्याज तथा लसहुन का सेवन नहीं करते हैं। इन लोगों के रक्त में लिपिड का स्तर ज़्यादा रहता है तथा रक्त में थक्का भी जल्दी बनता है। प्याज़ प्राकृतिक एन्टीक्लोटिंग एजेंट यानि यह खून को गाढ़ा होने से रोकता है।
प्याज़ पर हुए कुछ शोध बताते हैं कि प्याज़ का सेवन करने वाले लोगों में पेट के केंसर का खतरा आधा रह जाता है। चीनी लोग, जो सबसे ज़्यादा प्याज़ तथा लसहुन का सेवन करते हैं, में पेट के केंसर का खतरा ४० प्रतिशत कम होता है।
प्याज़ त्वचा की म्यूकस परत में रक्त के स्राव को बढ़ाता है। कटे हुए प्याज़ को त्वचा पर रगड़ने से मस्से भी ख़त्म हो जाते हैं। चोट तथा छालों से होने वाली जलन में भुने हुए प्याज़ का लेप लगाने से बहुत आराम मिलता है। इस लेप को लगाने से छाले जल्दी पक जाते हैं। प्याज़ का रस को प्लम तथा गाजर के रस के मिला कर चेहरे पर लगाने से मुँहासे ठीक होते हैं। चेहरे के जिस भाग की त्वचा तैलीय है वहाँ कटे हुए प्याज़ का अंदरूनी भाग रगड़ने से आशाजनक परिणाम दिखते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी बहुत सी बीमारियों जैसे भूख न लगना, सर्दी, जुकाम, दमा आदि में प्याज़ के उपयोग को समर्थन देता है। प्याज़ वायुनली में सूजन तथा दर्द को कम करता है। प्याज का रस दमे के मरीजों में एलर्जी से होने वाली तकलीफ़ को कम करता है। प्याज़ कोलोन में होने वाले ट्यूमर की वृद्धि को रोकता है। प्याज़ में अच्छी मात्रा में ओलिगोसैकेराइड होते हैं जो कि कोलोन में नुकसान करने वाले बैक्टीरिया की वृद्धि को कम करते हैं।
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Saturday, 5 March 2016

Aslam Sonu A S group in Room At laxminiya ghailarh

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